बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बड़ा उलटफेर! एक और प्रमुख दल के उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने से कांग्रेस को बड़ा फायदा हुआ है। जानिए पूरी खबर।

बिहार चुनाव 2025 के दौरान लगातार बड़े राजनीतिक उलटफेर सामने आ रहे हैं। छपरा की मढ़ौरा विधानसभा सीट से लोजपा (रामविलास) की प्रत्याशी सीमा सिंह के बाद अब महागठबंधन के एक प्रमुख घटक दल CPI (Communist Party of India) के उम्मीदवार का नामांकन भी रद्द कर दिया गया है।

दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में समस्तीपुर जिले की रोसड़ा विधानसभा सीट पर बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान CPI उम्मीदवार लक्ष्मण पासवान का नामांकन तकनीकी त्रुटि के कारण रद्द कर दिया गया। निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि प्रपत्र 26 में गलती होने की वजह से यह कार्रवाई की गई। उल्लेखनीय है कि रोसड़ा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।

इस सीट पर महागठबंधन के दो घटक दल — कांग्रेस और CPI — दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, क्योंकि सीट बंटवारे को लेकर समझौता नहीं हो सका था। लक्ष्मण पासवान को 16 अक्टूबर को पार्टी सिंबल मिला था और उन्होंने 17 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किया था।

नामांकन रद्द होने के बाद लक्ष्मण पासवान ने निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन पदाधिकारी ने सुबह 11 बजे तक फॉर्म में सुधार कर जमा करने को कहा था और उन्होंने समय से पहले संशोधित फॉर्म जमा भी कर दिया था। इसके बावजूद उनका नामांकन यह कहते हुए अस्वीकृत कर दिया गया कि फॉर्म में अब भी त्रुटियां हैं।

इस घटनाक्रम के बाद रोसड़ा सीट पर महागठबंधन की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। पहले ही कांग्रेस और CPI के बीच “फ्रेंडली फाइट” की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब CPI के बाहर होने से कांग्रेस को कुछ लाभ मिल सकता है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर CPI कार्यकर्ताओं में असंतोष देखने को मिल रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्मण पासवान की दलित और मजदूर वर्ग में मजबूत पकड़ थी। उनके बाहर होने से इन वोटों पर असर पड़ सकता है, जिससे महागठबंधन को नुकसान और कांग्रेस को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है।

नामांकन रद्द होने के बाद CPI समर्थकों ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लक्ष्मण पासवान को जानबूझकर बाहर किया गया ताकि अन्य दल को फायदा हो। इस बीच CPI की जिला इकाई आगे की रणनीति पर विचार कर रही है।

वहीं, निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी नामांकन पत्रों की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। जहां आवश्यक दस्तावेजों की कमी या त्रुटि पाई गई, वहां नामांकन रद्द किया गया है। उन्होंने कहा कि यह एक तकनीकी मामला है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ है।

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